रज रममहन रय वयकततव एव अतम चरण

महापुरुषों का प्रादुर्भाव युग की आवश्यकता के अनुरूप ही होता है। उसी प्रकार राजाराममोहन राय भी अपनी युग की महत्ती आवश्यकता थे। अपने युग के जनक एवं संतति थे। ऐसे महान युगपुरुष के व्यक्तित्व एवं कृतित्व ने भारत भूमि को नवीन दिशा दी। उन्होंने धर्म शिक्षा तथा समाज सुधार सहित सभी क्षेत्रों में अपने विचारों से नवीन जागृति का संचार किया। उनका व्यक्तित्व एवं कृतित्व का एक-एक पहलू आज भी खोज की अपेक्षा रखता है। वस्तुत: राममोहनराय महाननायक के व्यक्तित्व जीवन से संबंधित विशेषकर उनके जीवन के प्रारम्भिक चरण एवं कलकत्ता में व्यतीत किए काल के संबंधित अधिक विवरण का अभाव है। राजा राममोहनराय ने असंख्य लेख, पुस्तकें, पत्र आदि लिखे किन्तु अपने जीवन के विषय में कुछ नहीं लिखा। बहुत कहने पर इंग्लैण्ड से कलकत्ता में मित्र मि. गार्डन को एक पत्र लिखा जो अत्यंत संक्षेप में उनके जीवन संबंधी कुछ तथ्यों को प्रस्तुत करता है। विलियम एडम तथा मोंटगुमरी मार्टिन जैसे घनिष्ठ लोगों ने उन पर लिखा है किन्तु वे विवरण उनके व्यक्तित्व के कुछेक पहलुओं पर ही प्रकाश डालते हैं। समूचे व्यक्तित्व पर नहीं। ब्रिस्टल जाने के बाद मेरी कारपेन्टर ने उनके जीवन का दैनिक ब्योरा लिखा है। जो ‘लास्ट डेज इन इंग्लैण्ड ऑफ द राजा राममोहनराय’ शीर्षक से प्रकाशित हुआ है। इसमें उनके पुराने मित्र डॉ. लेंट कारपेन्टर ने उनकी जीवनी पर एक रेखांकन भी किया है। इस विवरण में बीमारी से लेकर अंतिम क्षण, अंतिम संस्कार निजी नौकरी के दु:ख आदि अत्यंत भावात्मक और सजीव रूप से चित्रित किया है।

Authors

Publication Details

Journal
Iconic Research and Engineering Journals
Published
2026-10-26
DOI
https://doi.org/10.64388/irev10i4-1724313
Primary Topic
South Asian Studies and Diaspora
Type
article
Field-Weighted Citation Impact
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रज रममहन रय वयकततव एव अतम चरण

Rajesh Sakwar
Iconic Research and Engineering Journals
South Asian Studies and Diaspora
article

रज रममहन रय वयकततव एव अतम चरण

Rajesh Sakwar
article en

Abstract

महापुरुषों का प्रादुर्भाव युग की आवश्यकता के अनुरूप ही होता है। उसी प्रकार राजाराममोहन राय भी अपनी युग की महत्ती आवश्यकता थे। अपने युग के जनक एवं संतति थे। ऐसे महान युगपुरुष के व्यक्तित्व एवं कृतित्व ने भारत भूमि को नवीन दिशा दी। उन्होंने धर्म शिक्षा तथा समाज सुधार सहित सभी क्षेत्रों में अपने विचारों से नवीन जागृति का संचार किया। उनका व्यक्तित्व एवं कृतित्व का एक-एक पहलू आज भी खोज की अपेक्षा रखता है। वस्तुत: राममोहनराय महाननायक के व्यक्तित्व जीवन से संबंधित विशेषकर उनके जीवन के प्रारम्भिक चरण एवं कलकत्ता में व्यतीत किए काल के संबंधित अधिक विवरण का अभाव है। राजा राममोहनराय ने असंख्य लेख, पुस्तकें, पत्र आदि लिखे किन्तु अपने जीवन के विषय में कुछ नहीं लिखा। बहुत कहने पर इंग्लैण्ड से कलकत्ता में मित्र मि. गार्डन को एक पत्र लिखा जो अत्यंत संक्षेप में उनके जीवन संबंधी कुछ तथ्यों को प्रस्तुत करता है। विलियम एडम तथा मोंटगुमरी मार्टिन जैसे घनिष्ठ लोगों ने उन पर लिखा है किन्तु वे विवरण उनके व्यक्तित्व के कुछेक पहलुओं पर ही प्रकाश डालते हैं। समूचे व्यक्तित्व पर नहीं। ब्रिस्टल जाने के बाद मेरी कारपेन्टर ने उनके जीवन का दैनिक ब्योरा लिखा है। जो ‘लास्ट डेज इन इंग्लैण्ड ऑफ द राजा राममोहनराय’ शीर्षक से प्रकाशित हुआ है। इसमें उनके पुराने मित्र डॉ. लेंट कारपेन्टर ने उनकी जीवनी पर एक रेखांकन भी किया है। इस विवरण में बीमारी से लेकर अंतिम क्षण, अंतिम संस्कार निजी नौकरी के दु:ख आदि अत्यंत भावात्मक और सजीव रूप से चित्रित किया है।

Iconic Research and Engineering JournalsVol. 10(4)
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