रषटरय शकष नत (NEP) और बदध दरशन: एक वशलषणतमक अधययन
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और बौद्ध दर्शन: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन डाॅ. अर्चना कुमारी करण वत्र्तमान युग में ऐसी परिस्थितियाँ निर्मित हो रही हैं, जिसमें आज का मानव स्वयं को असहाय, असुरक्षित व थका हुआ महसूस कर रहा है, अतः यह आवश्यक है कि एक समन्वयवादी सोंच के प्रति सामान्यजन के आस्था को पुष्टित करंे और साथ ही वैज्ञानिक सत्यों को स्वीकारते हुए जीवन के उदात्त मूल्यों को अंगीकार कर सके। नई शिक्षा नीति इस दिशा में एक स्वागत योग्य कदम है, जिसमें शिक्षा का उद्देश्य मात्र धन अर्जन करना नहीं है अपितु विद्यार्थियों में नैतिक उच्चता एवं नैतिक मूल्यों को भी बढावा देना है। इस दिशा में बौद्ध मूल्यों को समाहित करके नई शिक्षा प्रणाली को और भी परिपूर्ण बनाया जा सकता है। गौतम बुद्ध के उपदेश प्राचीन भारतीय ज्ञान परम्परा के केन्द्र बिन्दु थें, उन्होंने ज्ञान, प्रज्ञा एवं सत्य के खोज को सर्वोच्च मानवीय लक्ष्य माना। बुद्ध की शिक्षाओं का लक्ष्य सांसारिक जीवन के लिए ज्ञान अर्जन मात्र नहीं अपितु पूर्ण आत्म-ज्ञान एवं मुक्त्ति प्राप्त करना था। तत्कालीन समय में तक्षशिला, नालन्दा, विक्रमशिला तथा वल्लभी जैसे विश्व-स्तरीय संस्थान बौद्ध शिक्षा के केन्द्र थें, इन संस्थाओं ने अध्ययन के विभिन्न क्षेत्रों; यथा- नैतिक ज्ञान, मनोविज्ञान, दर्शन, कला इत्यादि में शिक्षण और शोध के उच्च प्रतिमान स्थापित किये। तथागत बु़़़़़द्ध की शिक्षा व दर्शन इन शिक्षालयों के आधार थें। बुद्ध ने मैत्री, करुणा, मुदिता एवं उपेक्खा के माध्यम से भारत की सामासिक संस्कृति की आधारशिला रखी। उन्होंने आचरण (शील) को जीवन का आधार माना क्योंकि बिना सदाचरण के मानव जीवन प्रतिष्ठित नहीं हो सकता। नई शिक्षा नीति भी इन्हीं मूल्यों पर बल देती है।
Authors
- डाॅ. अर्चना कुमारी करण
Publication Details
- Journal
- Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
- Published
- 2026-10-09
- DOI
- https://doi.org/10.5281/zenodo.23261814
- Primary Topic
- Indian and Buddhist Studies
- Type
- article
- Field-Weighted Citation Impact
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