सवय सहयत समह (SHGs) क कषमत नरमण एव पचयत रज ससथओ (PRIs) क सथ अभसरण: सतन जल म CBPR आधरत एक अधययन
"विकसित भारत @2047" का दृष्टिकोण भारत की स्वतंत्रता की शताब्दी तक इसे एक पूर्णतः विकसित, आत्मनिर्भर एवं सामाजिक रूप से न्यायपूर्ण राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की परिकल्पना करता है। इस दृष्टिकोण को ग्रामीण स्तर पर साकार करने का केंद्रबिंदु सामुदायिक संस्थाओं विशेष रूप से स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को महिला आर्थिक सशक्तिकरण, वित्तीय समावेशन एवं सहभागी स्थानीय शासन के वाहक के रूप में सशक्त बनाना है। दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण जीविकोपार्जन मिशन (DAY NRLM) ने देशभर में करोड़ों ग्रामीण महिलाओं को SHGs, ग्राम संगठनों (VOs) एवं क्लस्टर स्तरीय संघों (CLFs) से सफलतापूर्वक जोड़ा है, परंतु राष्ट्रीय नीति की मंशा एवं ज़मीनी संस्थागत क्षमता के मध्य एक निरंतर अंतराल विद्यमान है। SHGs अक्सर पृथक आर्थिक इकाइयों के रूप में कार्य करते हैं, न कि ग्राम सभा विचार विमर्श, ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) एवं सामाजिक अंकेक्षण जैसी स्थानीय शासन प्रक्रियाओं में एकीकृत सहभागी के रूप में। यह विसंगति विकसित भारत @2047 के अंतर्गत परिकल्पित समावेशी, आधार स्तरीय विकास में SHGs की परिवर्तनकारी क्षमता को सीमित करती है। यह शोध पत्र इस अंतराल को संबोधित करते हुए SHGs हेतु एक संदर्भ विशिष्ट, चरणबद्ध क्षमता निर्माण रोडमैप के निर्माण के लिए समुदाय आधारित सहभागी शोध (Community Based Participatory Research – CBPR) फ्रेमवर्क प्रस्तावित करता है, जो पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) की संरचना से स्पष्ट रूप से संरेखित है। यह अध्ययन मध्य प्रदेश के सतना ज़िले जो विंध्य क्षेत्र में स्थित, कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था, वन सीमा आधारित आजीविका एवं उल्लेखनीय सामाजिक आर्थिक असमानताओं से युक्त ज़िला है में स्थित है, तथा चार प्रतिनिधि गाँवों झाली, रायगांव, सोहावल एवं सिंहपुर पर केंद्रित है। इन गाँवों का चयन उद्देश्यपूर्ण रूप से सुगमता, प्रमुख आजीविका एवं SHG परिपक्वता में भिन्नता को दर्शाने हेतु किया गया, जिससे एक तुलनात्मक एवं प्रतिकृति योग्य मॉडल संभव हो सके। CBPR पद्धति के अंतर्गत, SHG सदस्यों, पंचायत प्रतिनिधियों एवं ब्लॉक स्तरीय आजीविका मिशन अधिकारियों को केवल शोध विषय नहीं, बल्कि सह अन्वेषक के रूप में स्थान दिया गया है। सहभागी ग्रामीण आकलन (PRA) उपकरणों, फोकस समूह चर्चाओं, अर्ध संरचित साक्षात्कारों एवं पुनरावृत्तिपूर्ण सह निर्माण कार्यशालाओं के माध्यम से यह अध्ययन चार क्षेत्रों में क्षमता अंतराल की पहचान करता है: वित्तीय एवं डिजिटल साक्षरता, उद्यमिता एवं मूल्य श्रृंखला कौशल, शासन सहभागिता, तथा नेतृत्व विकास। इन निष्कर्षों के आधार पर एक चार चरणीय क्षमता निर्माण रोडमैप प्रस्तावित किया गया है, जिसे 36 महीनों की अवधि में मौजूदा GPDP नियोजन चक्रों के साथ तालमेल बनाकर क्रियान्वित करने की योजना है। समुदाय सत्यापित एवं शासन संरेखित प्रक्रियाओं में क्षमता निर्माण डिज़ाइन को आधारित करते हुए, यह अध्ययन भारत के अन्य आकांक्षी ज़िलों हेतु एक प्रतिकृति योग्य प्रतिमान प्रस्तुत करता है, जो विकसित भारत @2047 के अंतर्गत परिकल्पित सहभागी, समावेशी एवं आत्मनिर्भर ग्रामीण विकास में सीधा योगदान देता है।
Authors
- प्रियंका बागरी
Publication Details
- Journal
- JMA Journal of Multidisciplinary Management and Research
- Published
- 2026-09-30
- DOI
- https://doi.org/10.5281/zenodo.23057716
- Primary Topic
- Social and Economic Development in India
- Type
- article
- Field-Weighted Citation Impact
- 0.00