भरत म ई-करटस और नयय तक पहच सवधनक और वधनक ढच क अतरगत नययपलक क डजटल रपतरण क मलयकन

इक्कीसवीं सदी को सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी की सदी कहा जाता है। डिजिटल तकनीक ने शासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार तथा न्याय प्रशासन सहित समाज के प्रत्येक क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन उत्पन्न किया है। भारतीय न्यायपालिका, जो लंबे समय से लंबित मामलों, न्यायिक विलंब, प्रक्रियागत जटिलताओं तथा न्याय तक सीमित पहुँच जैसी समस्याओं का सामना कर रही थी, ने भी डिजिटल परिवर्तन को अपनाते हुए ई-कोर्ट्स प्रणाली का विकास किया है। ई-कोर्ट्स परियोजना का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रियाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ना, न्यायालयों की कार्यकुशलता बढ़ाना तथा नागरिकों को त्वरित एवं सुलभ न्याय उपलब्ध कराना है। भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना के अंतर्गत प्रारंभ की गई ई-कोर्ट्स मिशन मोड परियोजना ने न्यायालयों में ई-फाइलिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, ऑनलाइन केस ट्रैकिंग, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड प्रबंधन तथा वर्चुअल सुनवाई जैसी सुविधाओं का विकास किया। ब्व्टप्क्-19 महामारी के दौरान इन तकनीकी व्यवस्थाओं ने न्यायिक कार्यों की निरंतरता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह शोध लेख ई-कोर्ट्स प्रणाली के विकास, संवैधानिक आधार, वैधानिक संरचना तथा न्याय तक पहुँच पर इसके प्रभाव का विश्लेषण करता है। अध्ययन में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 एवं 39।, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, भारतीय साक्ष्य अधिनियम तथा नवीन डिजिटल डेटा संरक्षण व्यवस्था का परीक्षण किया गया है। शोध में यह पाया गया कि ई-कोर्ट्स प्रणाली ने न्यायिक पारदर्शिता, दक्षता तथा उत्तरदायित्व को बढ़ाया है, किंतु डिजिटल विभाजन, साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता तथा तकनीकी अवसंरचना की कमी जैसी चुनौतियाँ अभी भी विद्यमान हैं। अध्ययन निष्कर्ष निकालता है कि यदि न्यायपालिका को मजबूत साइबर सुरक्षा तंत्र, उन्नत तकनीकी अवसंरचना तथा व्यापक डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों से सशक्त किया जाए, तो ई-कोर्ट्स प्रणाली भारतीय न्याय व्यवस्था को अधिक समावेशी, पारदर्शी एवं प्रभावी बना सकती है।

Authors

Publication Details

Journal
Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
Published
2026-06-25
DOI
https://doi.org/10.5281/zenodo.20842159
Type
article
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article

भरत म ई-करटस और नयय तक पहच सवधनक और वधनक ढच क अतरगत नययपलक क डजटल रपतरण क मलयकन

धीरज प्रजापति, श्री हरिशंकर कोरी
Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
article

भरत म ई-करटस और नयय तक पहच सवधनक और वधनक ढच क अतरगत नययपलक क डजटल रपतरण क मलयकन

धीरज प्रजापति, श्री हरिशंकर कोरी
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Abstract

इक्कीसवीं सदी को सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी की सदी कहा जाता है। डिजिटल तकनीक ने शासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार तथा न्याय प्रशासन सहित समाज के प्रत्येक क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन उत्पन्न किया है। भारतीय न्यायपालिका, जो लंबे समय से लंबित मामलों, न्यायिक विलंब, प्रक्रियागत जटिलताओं तथा न्याय तक सीमित पहुँच जैसी समस्याओं का सामना कर रही थी, ने भी डिजिटल परिवर्तन को अपनाते हुए ई-कोर्ट्स प्रणाली का विकास किया है। ई-कोर्ट्स परियोजना का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रियाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ना, न्यायालयों की कार्यकुशलता बढ़ाना तथा नागरिकों को त्वरित एवं सुलभ न्याय उपलब्ध कराना है। भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना के अंतर्गत प्रारंभ की गई ई-कोर्ट्स मिशन मोड परियोजना ने न्यायालयों में ई-फाइलिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, ऑनलाइन केस ट्रैकिंग, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड प्रबंधन तथा वर्चुअल सुनवाई जैसी सुविधाओं का विकास किया। ब्व्टप्क्-19 महामारी के दौरान इन तकनीकी व्यवस्थाओं ने न्यायिक कार्यों की निरंतरता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह शोध लेख ई-कोर्ट्स प्रणाली के विकास, संवैधानिक आधार, वैधानिक संरचना तथा न्याय तक पहुँच पर इसके प्रभाव का विश्लेषण करता है। अध्ययन में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 एवं 39।, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, भारतीय साक्ष्य अधिनियम तथा नवीन डिजिटल डेटा संरक्षण व्यवस्था का परीक्षण किया गया है। शोध में यह पाया गया कि ई-कोर्ट्स प्रणाली ने न्यायिक पारदर्शिता, दक्षता तथा उत्तरदायित्व को बढ़ाया है, किंतु डिजिटल विभाजन, साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता तथा तकनीकी अवसंरचना की कमी जैसी चुनौतियाँ अभी भी विद्यमान हैं। अध्ययन निष्कर्ष निकालता है कि यदि न्यायपालिका को मजबूत साइबर सुरक्षा तंत्र, उन्नत तकनीकी अवसंरचना तथा व्यापक डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों से सशक्त किया जाए, तो ई-कोर्ट्स प्रणाली भारतीय न्याय व्यवस्था को अधिक समावेशी, पारदर्शी एवं प्रभावी बना सकती है।

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