वदयरथय क सखन क नरधरत करन वल ततव एक अवलकन
विद्यार्थियों में सीखने के द्वारा हमारे व्यवहार मंे अपेक्षाकृत स्थायी किस्म के परिवर्तन अनुभवों के माध्यम से ही होते हैं। इनकी प्रकृति परिपक्वता की प्रक्रिया के परिणामस्वरूप होने वाले परिवर्तनांे से बिल्कुल भिन्न होती है। जो कुछ भी सीखने की प्रक्रिया के दौरान सीखा या उपार्जित किया जाता है वह उपार्जित व्यवहार ही होता है उसे जन्मजात नहीं कहा जा सकता। इस तरह सीखना या अधिगम को पुरी तरह से वातावरण की शक्तियों की ही देन समझा जाना चाहिए, वंशानुक्रम के फलस्वरूप जन्मजात नहीं। प्रश्न उठता है कि विद्यार्थियों का सीखना किस रूप में किन-किन वातारण के तत्वों से निर्धारित होता है। दूसरी ओर अधिगम का शिक्षण से भी गहरा रिश्ता होता है। जैसी शिक्षण प्रक्रिया अध्यापक के नेतृत्व में या उसके निर्देशन में संपन्न होती है, सीखने का स्वरूप भी बहुत कुछ वैसा ही होता है। अतः यह जानना नितान्त स्वभाविक हो जाता है कि वे ऐसे कौन से तत्व है जो विद्यार्थियों के सीखने तथा शिक्षण प्रक्रिया को निर्धारित करते है।
Authors
- डॉ. सुभाष कुमार सुमन
Institutions
- Meso Scale Discovery (United States) (US)
Publication Details
- Journal
- Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
- Published
- 2026-02-15
- DOI
- https://doi.org/10.5281/zenodo.18782425
- Primary Topic
- Military Technology and Strategies
- Type
- article
- Field-Weighted Citation Impact
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