RASHTRIYA SHIKSHA NITI 2020 MAI SWAMI VIVEKANAND KE SHEKSHIK VICHARO KA SMAVESH

वर्तमान समय की माँग है ऐसी शिक्षा व्यवस्था जिसका विजन व्यापक और गहरा हो, जो यह माँग करती है कि शिक्षा को आन्तरिक और बाह्म दोनों ही तरह के विकास को पोषित करना चाहिए, बाहरी दुनिया के बारे में सीखना और अपनी आंतरिक वास्तविकता एवं स्वयं के बारे में सीखना साथ-साथ होना चाहिए। व्यावहारिकता अच्छा स्वास्थ्य और सामाजिक भावनात्मक कौशल, विचार पाने और विवेकपूर्ण चयन तथा निर्णय लेने की क्षमता का विकास, यह सब समेकित और समग्र रूप से होना चाहिए। सीखना केवल जानकारी इकट्ठा करना नहीं है बल्कि यह स्वयं के विकास, दूसरों के साथ अपने संबंधों के विकास ज्ञान के विभिन्न रूपों में विभेद करने की योग्यता और जो भी सीखा है उसे खुद के लिए और समाज के फायदे के लिए उपयोग करने की क्षमता है। उपरोक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू की है। इस नीति में स्पष्ट रुप से कहा गया है कि इस शिक्षा नीति का विजन राष्ट्रीय मूल्यों से विकसित शिक्षा प्रणाली है। अर्थात् भारतीय दर्शनों की शैक्षिक नीतियों का अनुसरण करना होगा, आधुनिक भारतीय दार्शनिकों में स्वामी विवेकानन्द जी का स्ािान महत्वपूर्ण है स्वामी विवेकानन्द जी की शिक्षा के प्रति दूरदर्शिता ही आज हमें यह जानने हेतु उत्सुकता से भर देती है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में स्वामी विवेकानन्द जी के शैक्षिक विचारों को कितना आत्मसात किया है। इस शोध आलेख में इसी समरूपता को दृष्टिगोचर करने का प्रयास किया गया है।

Authors

Institutions

Publication Details

Journal
International Journal of Versatile Research and Analysis
Published
2026-02-01
DOI
https://doi.org/10.56975/ijvra.v4i2.700881
Primary Topic
Education, Innovation and Language Studies
Type
article
Field-Weighted Citation Impact
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article

RASHTRIYA SHIKSHA NITI 2020 MAI SWAMI VIVEKANAND KE SHEKSHIK VICHARO KA SMAVESH

Prakash Chandra Upreti, RAJANI UPRETI
International Journal of Versatile Research and Analysis
Education, Innovation and Language Studies
article

RASHTRIYA SHIKSHA NITI 2020 MAI SWAMI VIVEKANAND KE SHEKSHIK VICHARO KA SMAVESH

Prakash Chandra Upreti, RAJANI UPRETI
article en

Abstract

वर्तमान समय की माँग है ऐसी शिक्षा व्यवस्था जिसका विजन व्यापक और गहरा हो, जो यह माँग करती है कि शिक्षा को आन्तरिक और बाह्म दोनों ही तरह के विकास को पोषित करना चाहिए, बाहरी दुनिया के बारे में सीखना और अपनी आंतरिक वास्तविकता एवं स्वयं के बारे में सीखना साथ-साथ होना चाहिए। व्यावहारिकता अच्छा स्वास्थ्य और सामाजिक भावनात्मक कौशल, विचार पाने और विवेकपूर्ण चयन तथा निर्णय लेने की क्षमता का विकास, यह सब समेकित और समग्र रूप से होना चाहिए। सीखना केवल जानकारी इकट्ठा करना नहीं है बल्कि यह स्वयं के विकास, दूसरों के साथ अपने संबंधों के विकास ज्ञान के विभिन्न रूपों में विभेद करने की योग्यता और जो भी सीखा है उसे खुद के लिए और समाज के फायदे के लिए उपयोग करने की क्षमता है। उपरोक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू की है। इस नीति में स्पष्ट रुप से कहा गया है कि इस शिक्षा नीति का विजन राष्ट्रीय मूल्यों से विकसित शिक्षा प्रणाली है। अर्थात् भारतीय दर्शनों की शैक्षिक नीतियों का अनुसरण करना होगा, आधुनिक भारतीय दार्शनिकों में स्वामी विवेकानन्द जी का स्ािान महत्वपूर्ण है स्वामी विवेकानन्द जी की शिक्षा के प्रति दूरदर्शिता ही आज हमें यह जानने हेतु उत्सुकता से भर देती है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में स्वामी विवेकानन्द जी के शैक्षिक विचारों को कितना आत्मसात किया है। इस शोध आलेख में इसी समरूपता को दृष्टिगोचर करने का प्रयास किया गया है।

International Journal of Versatile Research and AnalysisVol. 4(2)
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Education, Innovation and Language Studies
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