शकषक वकस म अनसधन क यगदन: एक वशलषणतमक अधययन
अनुसंधान का तात्पर्य नए तथ्यों, साक्ष्यों एवं ज्ञान की खोज से है। यह किसी भी क्षेत्र में ज्ञान-विस्तार, नवीन दृष्टिकोणों के विकास तथा व्यावहारिक प्रक्रियाओं के सुदृढ़ीकरण का आधार है। यदि अनुसंधान न हो तो किसी भी क्षेत्र में ठहराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिसके परिणामस्वरूप विकास की संभावनाएँ सीमित हो जाती हैं। अनुसंधान के माध्यम से नए विचार, अभिनव तकनीकें तथा प्रभावी कार्यप्रणालियाँ विकसित होती हैं, जो न केवल शिक्षा-क्षेत्र बल्कि समग्र सामाजिक संरचना के उत्थान में सहायक सिद्ध होती हैं। यद्यपि अनेक लोग विभिन्न कारणों से अनुसंधान में सक्रिय सहभागिता नहीं करते जैसे छात्र रुचि की कमी के कारण तथा कुछ शिक्षक मात्र पदोन्नति के उद्देश्य से फिर भी उनके लिए जो सीखने, नवीन विचारों की खोज करने तथा सृजनात्मक कार्य हेतु प्रतिबद्ध हैं, अनुसंधान अत्यंत महत्वपूर्ण है। अनुसंधान केवल ज्ञान अर्जन का साधन नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास, सामाजिक परिवर्तन तथा सतत मानवीय प्रगति का सशक्त माध्यम है। प्रस्तुत अध्ययन शिक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान की अनिवार्यता को प्रतिपादित करता है तथा यह स्पष्ट करता है कि अनुसंधान मानव और समाज के सतत एवं समग्र विकास में किस प्रकार महत्त्वपूर्ण योगदान देता है।
Authors
- डॉ. खुशबू दीवान
- डॉ. प्राची शर्मा
Institutions
- Weatherford College (US)
Publication Details
- Journal
- Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
- Published
- 2025-01-15
- DOI
- https://doi.org/10.5281/zenodo.18397446
- Primary Topic
- Military Technology and Strategies
- Type
- article
- Field-Weighted Citation Impact
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