भरतय भषए और रषटरय एकत
प्रस्तुत शोध आलेख भारत की भाषाई विविधता और राष्ट्रीय एकता के बीच के गहरे संबंधों को रेखांकित करता है। लेखिका ने भारत को &अनेकता में एकता* का प्रतीक मानते हुए भाषा को संस्कृति और सामाजिक मूल्यों की संवाहिका बताया है। आलेख में ब्रिटिश औपनिवेशिक नीतियों, विशेषकर &आर्य-द्रविड़* विभाजन और भाषा परिवारों की कृत्रिम अवधारणाओं की आलोचना की गई है। इसमें संस्कृत को भारतीय भाषाओं की जननी और राष्ट्रीय एकीकरण के मूल सूत्र के रूप में स्थापित किया गया है। अंततः, लेख प्रांतीयता और भाषावाद से ऊपर उठकर, हिंदी और प्रादेशिक भाषाओं के समन्वय के माध्यम से राष्ट्रीय अखंडता को सशक्त बनाने पर बल देता है।
Authors
- सुजाता मगदुम
Publication Details
- Journal
- Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
- Published
- 2026-01-30
- DOI
- https://doi.org/10.5281/zenodo.18330914
- Primary Topic
- Military Technology and Strategies
- Type
- article
- Field-Weighted Citation Impact
- 0.00