भरतय भष परवर और रषटरय एकत
प्रस्तुत शोध आलेख में भारतीय भाषा परिवारों और राष्ट्रीय एकता के अटूट संबंधों का विवेचन किया गया है। लेखिका ने रेखांकित किया है कि भाषा केवल अभिव्यक्ति का साधन न होकर भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता की संवाहक है। इसमें हिंदी को संपर्क एवं राजभाषा के रूप में देश को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी माना गया है। आलेख में संवैधानिक प्रावधानों, त्रि-भाषा सूत्र, तकनीकी अनुवाद और साहित्य (विशेषकर रामकथा और जयशंकर प्रसाद के साहित्य) की भूमिका पर प्रकाश डाला गया है। निष्कर्षतः, यह लेख सिद्ध करता है कि भारत की ‘अनेकता में एकता’ की अवधारणा को सशक्त बनाने में भाषाई समन्वय और साहित्यिक परंपराओं का योगदान सर्वोपरि है।
Authors
- महादेवी गुरव
Publication Details
- Journal
- Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
- Published
- 2026-01-30
- DOI
- https://doi.org/10.5281/zenodo.18330638
- Primary Topic
- Military Technology and Strategies
- Type
- article
- Field-Weighted Citation Impact
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