हसतशलप वकस यजनओ क अधययन छततसगढ क कडगव जल क वशष सदरभ म
हस्तशिल्प हमारी अर्थब्यवस्था के असंगठित क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह मुख्य रुप से ग्रामीण क्षेत्र की क्रियाकलाप है। जिसकी पहुंच पिछडे और दुर्गम क्षेत्रों में भी है। हस्तशिल्प न केवल लाखों लोगों को रोजगार प्रदान कर रही है वरन इस क्षेत्र में बडी संख्या में नये लोगों की संभावना है। केंद्र सरकार और राज्य सरकारें हस्तशिल्प और विशेषकर गा्रमीण हस्तशिल्प को बढावा देने के लिए कई योजनायें चला रही है। इसके तहत शिल्पकारों के लिए अनेक योजनायें चलाई जा रही है। योजनाओं की सफलता के लिए आवश्यक है कि शिल्पकार भी जागरुक हो। योजनायें केवल कागज पर नहीं चले। परीक्षण से स्पष्ट है कि सभी योजनाओ का पी का मूल्य 0.05 से अधिक है, अतः शून्य परिकल्पना स्वीकार होती है। हस्तशिल्प विकास कार्यक्रमों का हस्तशिल्प उत्पाद एवं विक्रय पर सार्थक प्रभाव नहीे पडा है। योजनाएं तभी सफल हो सकती है जब शासन के साथ साथ शिल्पकार भी जागरुक हों एवं अपने अधिकारों के लिए सजग हो।
Authors
- हितेश राठौर
- निर्मल राम नेताम
- अर्चना सेठी
Publication Details
- Published
- 2025-12-30
- DOI
- https://doi.org/10.52228/jrua.2026-32-1-5
- Primary Topic
- Military Technology and Strategies
- Type
- article
- Field-Weighted Citation Impact
- 0.00