बगल क वभजन, सवदश आदलन तथ मसलम
बंगाल विभाजन भारतीय राष्ट्रवाद के इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है। इस विभाजन ने भारतीयों को झकझोर के रख दिया था। 1905 में बंगाल प्रांत को धर्म के आधार पर मुस्लिम बहुल व हिन्दू बहुल क्षेत्रों के रूप में बांटा गया। बंगाल विभाजन के विरोध में बंगाल में स्वदेशी आंदोलन चलाया गया था। प्रार्थना, प्रदर्शन, रैलियाँ व बैठकों का आयोजन किया गया। विभाजन विरोधी भाषण दिए गए। विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया गया तथा स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग का वचन लिया गया। यह आंदोलन केवल बंगाल प्रांत तक ही सीमित नहीं था, पूरे भारत में राष्ट्रवादी नेताओं व आम जनता द्वारा इसको अपनाया गया था। बंगाल विभाजन तथा स्वदेशी आंदोलन के प्रति मुसलमानों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिली। कुछ मुसलमानों ने स्वदेशी आंदोलन का विरोध किया तो कुछ ने बंगाल विभाजन का। हालांकि 1911 में विभाजन को रद्द कर दिया था, लेकिन इसने भारतीयों के मस्तिष्क में विभाजन का ऐसा जहर डाल दिया कि 1947 में हमें बंगाल और भारत दोनों को धर्म के आधार पर विभाजित होते देखना पड़ा।
Authors
- शामराव कोरेटी
- नेहा आफरीन
Publication Details
- Published
- 2025-12-30
- DOI
- https://doi.org/10.52228/jrua.2026-32-1-8
- Primary Topic
- Military Technology and Strategies
- Type
- article
- Field-Weighted Citation Impact
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