भजपर लक ससकत क सनदरभ म लक परमपरओ क अधययन
भोजपुरी लोक संस्कृति व्यापक है, यह मानव जीवन के हर पहलू में समाहित है। यह व्यक्ति के जीवन को सुसंस्कृत एवं सुंदरता प्रदान करती है। विधि-विधान, जीवन जीने के साधन बन गये हैं। मानव को सुसंस्कृत जीवन हेतु मकान निर्माण, महल एवं किला, गांवों का निर्माण, भोजन, शिक्षा, साज-सज्जा, पहनावा, विभिन्न प्रकार के व्यवसाय जैसे पशु-पालन और शासन व्यवस्था आदि जीवन से संबंधित सांस्कृतिक झलक से गुंथे हैं। लोक परम्परा के अंतर्गत संस्कृति से संदर्भित पहलुओं पर विचार किया जाता है। जिसमें जीवन शैली, जीविका के तरीके, विकास के सांस्कृतिक आयाम, पहचान के रूप में संस्कृति, लोक साहित्य, धार्मिक कृत्य के अध्ययन, पुराणों, मौखिक परंपरा, सामाजिक आर्थिक नजरिया, समुदायों की कलात्मक परिपाटी आदि सम्मिलित होती हैं। साथ ही लोक परंपरा में भोजपुर की लोक शैलियाँ, लोक विधि-विधान, रीति-रिवाज, त्यौहार मनाने की विभिन्न पद्धतियाँ अनेक प्रकार के पारम्परिक खेल आदि को वर्णित किया जाता है। भोजपुर अंचल में विभिन्न जाति धर्म के लोग रहते हैं। उनके रीति-रिवाज, त्यौहार कार्यक्रमों का आयोजन, लोक-व्यवहार, सामाजिक व्यवस्था, संगीत, कृषक जीवन-शैली, रूढ़ियाँ आदि का अध्ययन किया जाता है। भोजपुरी लोक परम्पराओं में चउक चन्दा, साँझा पाराती, जलुआ, जातीय परंपरा, सिंदूर, नाग-पूजा, शीतला माई, घरौंदा, कोठिला, कपड़ों से निर्मित खिलौने, आभूषण, पानपत्ता, पचकोसी मेला, चैता, गंवई रंगमंच आदि का विशेष स्थान है।
Authors
- वर्षा रानी
Publication Details
- Published
- 2025-12-30
- DOI
- https://doi.org/10.52228/jrua.2026-32-1-7
- Primary Topic
- Military Technology and Strategies
- Type
- article
- Field-Weighted Citation Impact
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