रव जल क अरथवयवसथ म लघ एव कटर उदयग क परभव
संरचनात्मक आधारभूत परिवर्तन में सहायक आर्थिक विकास के मानक पहलुओं में लघु कुटीर उद्योगों का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। कुटीर उद्योग धन्धे समय अनुकूल सृजित होते हैं, विकसित होते हैं और मांग तथा उपयोगिता अनुकूल परिष्कृत एवं परिवर्धित होते हैं। एक दौर ऐसा था जब मशीनीकरण कम थीं उसकी जगह मानव श्रमशक्ति तथा कारीगरी सूक्ष्म एवं सुदृढ़ वस्तुओं का निर्माण करते थे। समय के साथ आये परिवर्तन ने मानव श्रमशक्ति की जगह मशीनीकरण कर दिया। जिससे वस्तुएं सरलता से कम श्रमशक्ति से और अवशिष्ट पदार्थों से वस्तुओं का निर्माण प्रारंभ कर दिया। मशीनों से बने दैनिक उपभोग की वस्तुओं में मृदा, काष्ठ, एवं धातु की जगह प्लास्टिक तथा मिश्रित अनुपयोगी धातुओं के माध्यम से उपभोक्ता वस्तुओं का निर्माण करने लगे हैं जिसका प्रभाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गहरा पड़ा है। कभी स्वावलम्बी रहने वाले ग्राम अब शहरों से आयातित वस्तुओं पर निर्भर होने लगे हैं। आचार्य तब होता है जब ग्राम में सब्जियाँ और दूध उपभोग के लिए पहुँचते हैं। निश्चत ही यह समस्या लघु कुटीर उद्योग धन्धों का पराभव होने से हो रहा है। उक्त बिन्दुओं को इस आलेख में प्रस्तुत करने का प्रयास है।
Institutions
- Weatherford College (US)
Publication Details
- Journal
- International Journal of Advanced Research in Science Communication and Technology
- Published
- 2025-10-16
- DOI
- https://doi.org/10.48175/ijarsct-29297
- Primary Topic
- Military Technology and Strategies
- Type
- article
- Field-Weighted Citation Impact
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