अलकक शकत कणडलन क मनव जवन म महतव
मनुष्य के अन्दर छिपी हुई अलौकिक शक्ति को कुण्डलिनी व चक्र कहा गया है । कुण्डलिनी वह दिव्य शक्ति है जिससे जगत मे जीव की श्रृष्टि होती है। कुण्डलिनी सर्प की तरह साढ़े तीन फेरे लेकर मेरूदण्ड के सबसे निचले भाग में मूलाधार चक्र में सुषुप्त अवस्था में पड़ी हुई है । मूलाधार में सुषुप्त पड़ी हुई कुण्डलिनी शक्ति जाग्रत होकर सुषुम्ना में प्रवेश करती है तब यह शक्ति अपने स्पर्श से स्वाधिष्ठान चक्र, मणिपुर चक्र, अनाहत चक्र, विशुद्धि चक्र तथा आज्ञा चक्र को जाग्रत करते हुए मस्तिष्क में स्थिति सहस्त्रार चक्र में पहुंच कर पूर्णंता प्रदान करती है इसी क्रिया को पूर्ण कुण्डलिनी जागरण कहा जाता है, जिसका मानव जीवन में अत्यन्त महत्वपूर्ण उपयोगिता है।
Institutions
- Weatherford College (US)
Publication Details
- Journal
- International Journal of Advanced Research in Science Communication and Technology
- Published
- 2025-09-30
- DOI
- https://doi.org/10.48175/ijarsct-29050
- Primary Topic
- Military Technology and Strategies
- Type
- article
- Field-Weighted Citation Impact
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