परमशकर रघवश क कवय म सवदन क आयम
मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के जमानी गाँव में जन्मे तथा सतपुड़ा एवं नर्मदा के अंचल में पले बड़े कवि प्रेमशंकर रघुवंशी (8 जनवरी 1936 से 2016) ने अपने प्राध्यादपकीय जीवन के दौरान अपने अंचल के साथ गहरा रागात्म क सम्बीन्धम स्थापित किया । कालांतर में यही रागात्म क संवेदना उनके गीतों और कविता में रूपायित हुई है । प्रकृति से जीवन तादात्मन रखते हुए लोक जीवन को जीते हुए और सामान्य जन के प्रति प्रतिबद्ध रहते हुए किसी साहित्यमकार या कवि की रचनाधर्मिता किस प्रकार विशिष्टि और ऊर्जावान होती है इसके साक्षात प्रमाण रूप में प्रेमशंकर रघुवंशी का काव्यप संसार है । जिसमें संवेदना के विविध आयामों में वैयक्तिक संवेदना, सार्वभौमिक से लेकर राष्ट्र-चिंतनपरक आदि संवेदना का विवेचन करना है ।
Authors
- प्रो. विष्णुज कुमार अग्रवाल
- श्रीमती गिरजेश ओझा
Institutions
- Human Growth Foundation (US)
Publication Details
- Journal
- International Journal of Advanced Research in Science Communication and Technology
- Published
- 2025-11-25
- DOI
- https://doi.org/10.48175/ijarsct-30059
- Primary Topic
- Military Technology and Strategies
- Type
- article
- Field-Weighted Citation Impact
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