महलओ क वरदध घरल हस : करण, परभव और समधन — एक अधययन
सभ्य समाज में हिंसा का कोई स्थान नहीं है। लेकिन प्रत्येक वर्ष घरेलू हिंसा के जितने मामले सामने आते हैं, वे एक चिंतनीय स्थिति को रेखांकित करते हैं। हमारे देश में घरों के बंद दरवाज़ों के पीछे लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है। यह कार्य ग्रामीण क्षेत्रों, कस्बों, शहरों और महानगरों में भी हो रहा है। घरेलू हिंसा सभी सामाजिक वर्गों, लिंग, नस्ल और आयु समूहों को पार कर एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी के लिये एक विरासत बनती जा रही है। इस आलेख में घरेलू हिंसा के कारणों, समाज और बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव तथा समस्या समाधान के उपाय तलाशने का प्रयास किया जाएगा।
Authors
- Mamta Yadav
- Ramesh Kumar Shukla
Publication Details
- Journal
- International Journal of Advanced Research in Science Communication and Technology
- Published
- 2025-11-11
- DOI
- https://doi.org/10.48175/ijarsct-29763
- Primary Topic
- Military Technology and Strategies
- Type
- article
- Field-Weighted Citation Impact
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