The relevance of Machiavelli's power politics.

मैकियावेली के द्वारा पश्चिमी चिंतन में पहली बार राजनीति को शक्ति राजनीति के रूप में चित्रित किया गया और उसने प्रिंस में लिखते हुए कहा कि शक्ति का अर्जन और शक्ति को बनाये रखना राजकुमार का मूल उद्देश्य है और उसके अनुसार राज्य को शक्तिशाली बनाये रखने के लिए राजा नैतिक व्यवहार भी अपना सकता है, परन्तु नैतिक होना राजा का उद्देश्य नहीं है बल्कि नैतिकता राजा के लिए साधन है और उसके अनुसार राज्य को शक्तिशाली बनाये रखने के लिए राजा को धूर्तता, चालाकी, धोखेबाजी सभी उपायों का प्रयोग करना चाहिए। इसलिए पश्चिमी चिन्तन में मैकियावेली पहला विचारक है जिसने राजनीति और नैतिकता के बीच विभाजन कर दिया, जिसका अभिप्राय है कि राजकुमार के कार्यों का नैतिक मूल्यांकन करना उचित नहीं है। मैकियावेली का चिंतन न तो नैतिक है और न ही अनैतिक, बल्कि यह नैतिकता से तटस्थ है अथवा अलग है जिसका अभिप्राय है कि राजकुमार को कार्य करते समय नैतिक मानदंडो के पालन की आवश्यकता नहीं है बल्कि उसे राज्य को शक्तिशाली बनाये रखने का प्रयत्न करना चाहिए और राज्य को शक्तिशाली बनाये रखने के लिए उसके द्वारा संपादित सभी कार्य नैतिक हैं। मैकियावेली ने शासनकला का विचार प्रतिपादित करते हुए शासन कला को केंद्रीय महत्व प्रदान किया गया। मैकियावेली ने यह माना कि राज्य की सुरक्षा साध्य है जिसके लिए किसी भी साधन का प्रयोग किया जा सकता है। जिसका यह भी अभिप्राय होता है कि राजा के कार्यों पर नैतिकता का बंधन लागू नहीं होगा। इस प्रकार यह शोध पत्र मैकियावेली के शक्ति राजनीति के विचार की प्रासंगिकता को रेखांकित करता है।

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Publication Details

Journal
International Journal of Scientific Development and Research
Published
2025-01-01
DOI
https://doi.org/10.56975/ijsdr.v10i6.303681
Primary Topic
Renaissance and Early Modern Studies
Type
article
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The relevance of Machiavelli's power politics.

Rohit Singh
International Journal of Scientific Development and Research
Renaissance and Early Modern Studies
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The relevance of Machiavelli's power politics.

Rohit Singh
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Abstract

मैकियावेली के द्वारा पश्चिमी चिंतन में पहली बार राजनीति को शक्ति राजनीति के रूप में चित्रित किया गया और उसने प्रिंस में लिखते हुए कहा कि शक्ति का अर्जन और शक्ति को बनाये रखना राजकुमार का मूल उद्देश्य है और उसके अनुसार राज्य को शक्तिशाली बनाये रखने के लिए राजा नैतिक व्यवहार भी अपना सकता है, परन्तु नैतिक होना राजा का उद्देश्य नहीं है बल्कि नैतिकता राजा के लिए साधन है और उसके अनुसार राज्य को शक्तिशाली बनाये रखने के लिए राजा को धूर्तता, चालाकी, धोखेबाजी सभी उपायों का प्रयोग करना चाहिए। इसलिए पश्चिमी चिन्तन में मैकियावेली पहला विचारक है जिसने राजनीति और नैतिकता के बीच विभाजन कर दिया, जिसका अभिप्राय है कि राजकुमार के कार्यों का नैतिक मूल्यांकन करना उचित नहीं है। मैकियावेली का चिंतन न तो नैतिक है और न ही अनैतिक, बल्कि यह नैतिकता से तटस्थ है अथवा अलग है जिसका अभिप्राय है कि राजकुमार को कार्य करते समय नैतिक मानदंडो के पालन की आवश्यकता नहीं है बल्कि उसे राज्य को शक्तिशाली बनाये रखने का प्रयत्न करना चाहिए और राज्य को शक्तिशाली बनाये रखने के लिए उसके द्वारा संपादित सभी कार्य नैतिक हैं। मैकियावेली ने शासनकला का विचार प्रतिपादित करते हुए शासन कला को केंद्रीय महत्व प्रदान किया गया। मैकियावेली ने यह माना कि राज्य की सुरक्षा साध्य है जिसके लिए किसी भी साधन का प्रयोग किया जा सकता है। जिसका यह भी अभिप्राय होता है कि राजा के कार्यों पर नैतिकता का बंधन लागू नहीं होगा। इस प्रकार यह शोध पत्र मैकियावेली के शक्ति राजनीति के विचार की प्रासंगिकता को रेखांकित करता है।

International Journal of Scientific Development and ResearchVol. 10(6)
Deen Dayal Upadhyaya Gorakhpur University (IN)
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Renaissance and Early Modern Studies
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