Social Change through Education: The Scheduled Caste Youth of Bihar
यह अध्ययन बिहार के गया, जहानाबाद और औरंगाबाद जिलों के अनुसूचित जाति युवाओं के उच्च शिक्षा अनुभवों का समाजशास्त्रीय विश्लेषण प्रस्तुत करता है, जिसमें सामाजिक पूंजी और सामाजिक समावेशन की भूमिका को केंद्र में रखा गया है। गुणात्मक पद्धति पर आधारित यह शोध पाँच छात्रों के गहन साक्षात्कारों पर आधारित है, जो ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले प्रथम पीढ़ी के शिक्षार्थी हैं। अध्ययन से यह सामने आया कि जिन छात्रों को शिक्षक, परिजन या वरिष्ठ छात्र से सकारात्मक संबंध और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ, उन्होंने शिक्षा में भागीदारी, आत्मविश्वास और स्पष्ट कैरियर दृष्टि का अनुभव किया। इसके विपरीत, जिनके संबंध कमजोर रहे या जिन्होंने संस्थागत उपेक्षा का सामना किया, उनमें अलगाव, असुरक्षा और आत्म-संकोच की प्रवृत्तियाँ दिखीं। कोविड-19 जैसी परिस्थितियों में यह सामाजिक पूंजी मानसिक संतुलन और शैक्षणिक निरंतरता का मुख्य आधार बनी। निष्कर्षतः यह स्पष्ट होता है कि शिक्षा केवल अकादमिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सामाजिक अनुभव है, जिसमें संबंधों की गुणवत्ता और समावेशी वातावरण की भूमिका निर्णायक होती है। इस अध्ययन से यह संकेत मिलता है कि यदि शिक्षण संस्थान समावेशी, सहयोगी और संवादात्मक संरचना विकसित करें, तो शिक्षा वंचित समुदायों के लिए सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बन सकती है।
Authors
- Sanjeev Kumar (ORCID: https://orcid.org/0000-0002-7968-194X)
Institutions
- Weatherford College (US)
Publication Details
- Journal
- International Journal of Novel Research and Development
- Published
- 2025-01-01
- DOI
- https://doi.org/10.56975/ijnrd.v10i5.307121
- Primary Topic
- Indian History and Philosophy
- Type
- article
- Field-Weighted Citation Impact
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